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कंपनी के बारे में

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एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड जिसे इससे पूर्व नेशनल बिल्डिंग्‍स कन्‍स्‍ट्रक्‍शन कॉर्पोरेशन लिमिटेड के नाम से जाना जाता था शहरी विकास मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन ब्लू चिप नवरत्न उद्‌यम है। दोनों शेयर बाजारों में सूचीबद्‌ध कंपनी के अद्वितीय व्यापार मॉडल के कारण आज कंपनी के पास निर्माण क्षेत्र में अग्रणी होने के साथ मार्च 2016 तक 36000 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य आदेश मौजूद हैं जो लगातार बढ़ रहे हैं। पूर्व वर्ष की तुलना में वर्ष 2015-16 के दौरान कंपनी ने टॉप लाइन में 32% की उल्लेखनीय वृद्‌धि दर्ज की है। कंपनी ने वर्ष 2015-16 के दौरान 311 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया है तथा कंपनी की कुल आय बढ़कर 5838 करोड़ रुपये हो गई है।

भारतीय मानक ब्यूरो से परियोजना प्रबंधन परामर्श हेतु आईएसओ 9001:2008 प्रमाणन प्राप्त इस कंपनी का प्रचालन मुख्‍य रूप से तीन खंडों (I) परियोजना प्रबंधन परामर्श (पीएमसी) (II) रियल एस्‍टेट विकास तथा (III) ईपीसी संविदा वगीकृत है ।

एनबीसीसी पीएमसी के रूप में कई उल्लेखनीय परियोजनाओं का निष्पादन कर रही है जोकि वार्षिक राजस्व में 85 प्रतिशत का योगदान प्रदान करती है। कंपनी के सशक्त क्षमता वाले इस क्षेत्र में सड़कें, अस्पताल तथा चिकित्सा महाविद्‌यालय , संस्थान, कार्यालय, विमानपत्तन ,पुल, औद्‌योगिक एवं पर्यावरणीय संरचनाएं आदि शामिल हैं।

कंपनी का स्थावर संपदा खंड जोकि 1988 में अस्तित्व में आया था, मुख्य रूप से वाणिज्यिक स्थावर संपदा परियोजनाओं को क्रियान्वित कर रहा है आज इसके प्रचालन में बड़ा परिवर्तन आया है। बदलते कारोबारी परिदृश्य को देखते हुए अपने तेजी से विकास के साथ-साथ अपने मार्जिन को बढ़ाने के क्रम में, एनबीसीसी ने स्थावर संपदा में नए आयाम देकर अपने प्रचालनों की नीति में बदलाव किए हैं। कंपनी का रियल एस्‍टेट व्‍यापार, परियोजनाओं के उद्‌गम के स्रोत के आधार पर दो वर्गों में विभक्‍त है अर्थात प्रथम आंतरिक रूप से तैयार तथा संकल्पित परियोजनाएं जहां कंपनी निजी तथा सरकारी एजेंसियों से भूमि खरीदकर तथा उसे विकसित करके बेचती है तथा दूसरे में कंपनी को सरकार से भूमि प्राप्‍त होती है जिस पर एनबीसीसी सरकारी कॉलोनियों का पुनर्विकास एक मॉडल के रूप में करती है जो कि एक स्‍व वित्‍तपोषित परियोजना होती है जिसमें सरकारी निधि की आवश्‍यकता नहीं होती है। सामान्य पूल रिहायशी आवास (जीपीआरए) के तहत न्यू मोती बाग - ग्रीन कॉम्प्लेक्स (दिल्ली) हाल के दिनों में इस तरह के पुनर्विकास के काम के बेहतरीन उदाहरणों में से एक है। यह परियोजना आज देश में अपनी तरह के सबसे बड़े हरित गृह परिसर के रूप में प्रमाणित की गई है।

एनबीसीसी द्वारा सरकार की न्‍यू मोती बाग पुनर्विकास परियोजना के कार्यान्‍वयन की सफलता के आधार पर सरकार द्वारा कंपनी को बड़ी संख्‍या में पुनर्विकास परियोजनाओं का कार्य सौंपा गया है।

पुनर्विकास के अलावा, स्थावर संपदा भी एक और वर्ग है जिससे कंपनी को भविष्य में अपार संभावनाएं हैं, वर्तमान में देश के विभिन्न स्थानों पर 30 आवासीय और वाणिज्यिक रियल एस्टेट परियोजनाएं चल रही हैं और अधिक निवेश के साथ और भी परियोजनाएं आ रही हैं।

पारदर्शिता तथा निगमित अभिशासन के प्रयासों की दिशा में एनबीसीसी द्वारा डिजिटल इंडिया के छत्र के तले संबंधित क्षेत्रों के मुद्दों के प्रभावी निपटान के लिए वेंडर शिकायत प्रणाली तथा ऑन लाइन वार्षिक संपत्ति विवरणी पोर्टल शुरू किए गए हैं। कार्यालयी फाइलों की ऑन लाइन ट्रैकिंग के लिए दस्‍तावेज प्रबंधन प्रणाली का कार्यान्‍वयन किया जा रहा है। जिसके पूर्ण रूप से कार्यान्वित हो जाने पर कागज की खपत कम होगी तथा एनबीसीसी के हरित प्रयासों में वृद्धि होगी।

कंपनी शीघ्र ही ई-वाणिज्य नाम से नवीन व्यापार उद्‌यम प्रारंभ करने वाली है जो एनबीसीसी स्थावर संपदा तथा सरकारी विभागों, वित्तीय संस्थानों एवं निजी विकासकर्ताओं की भी निर्मित संपत्तियों की बिक्री हेतु सहायता प्रदान करेगा।

एनबीसीसी अवसंरचना क्षेत्र में भी प्रचालन कर रही है इसे ईपीसी नाम से जाना जाता है इसके अंतर्गत चिमनी, कूलिंग टावर और विभिन्न प्रकार के बिजली संयंत्रों का निर्माण शामिल है।

कंपनी ने ग्रीन भवनों का निर्माण करके स्‍वयं प्रसिद्धि हासिल की है। इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ कार्पोरेट अफेयर्स का कार्यालय, मनेसर (हरियाणा) कंपनी द्वारा किया गया इस प्रकार का एक पहला निर्माण कार्य है जिसे वर्ष 2012 में इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (आईजीबीसी) द्वारा, नवीन निर्माण के लिए लीड इंडिया के तहत प्रतिष्ठित गोल्ड रेटिंग प्रदान की गई है। सीएसओआई, नई दिल्‍ली; आयकर भवन, नोएडा (उ.प्र.); एसआईबी, कोलकाता; कोल इंडिया भवन, कोलकाता, ,सीबीआई मुख्यालय भवन, नई दिल्ली, 5 स्टार रेटिंग प्राप्त नेशनल इंस्टीट्‌यूट फार सोलर एनर्जी, गुड़गाँव हरियाणा इत्‍यादि कुछ महत्‍वपूर्ण ग्रीन भवन हैं जिनका निर्माण एनबीसीसी द्वारा किया गया है ।

एनबीसीसी को जवाहर लाल नेहरू राष्‍ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) जिसे अब अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन टांसफॉर्मेशन (एएमआरयूटी) नाम दिया गया है, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई), ठोस कचरा प्रबंधन (एसडब्‍ल्‍यूएम) के तहत तथा पूर्वोत्‍तर क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए कार्यान्‍वयन एजेंसी नियुक्‍त किया गया है। एनबीसीसी के वृहत अनुभव तथा सेवाओं की गुणवत्‍ता के कारण केंद्र सरकार के कई मंत्रालय तथा राज्‍य सरकारें एक इंजीनियरी सहयोगी के रूप में इसकी सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं।

कंपनी को पब्लिक वर्क्‍स ऑर्गेनाइज़ेशन (पीडब्‍ल्‍यूओ) के रूप में अधिसूचित किया गया है, जीएफआर के संशोधित नियम 126(2) के अंतर्गत एक ऐसी निर्माण एजेंसी जिसके अनुसार सरकारी विभाग (विभागों) / पीएसयू तथा स्‍वायत्‍तशासी निकाय एनबीसीसी को नामांकन आधार पर कार्य दे सकते हैं।

संधारणीय विकास के मुद्दे पर प्रभावी प्रयासों के लिए एनबीसीसी द्‌वारा "संधारणीय सिविल अवसंरचना" हेतु आईआईटी, रुड़की के सहयोग से संयुक्त अनुसंधान एवं विकास केंद्र की स्थापना की गई है। यह केंद्र, इन प्रयासों के मूल्यवर्धन के लिए आवश्यक प्रौद्‌योगिकी उन्नयन एवं नवीयन पर कार्य करेगा।

विदेशी प्रचालन

एनबीसीसी ने वर्ष 1977 में विदेशी प्रचालन में कदम रखा तथा एनबीसीसी द्वारा लीबिया, इराक, यमन, नेपाल, मालदीव, मॉरीशस, तुर्की, बोत्सवाना जैसे देशों में विविध प्रकृति की परियोजनाओं को क्रियान्वित किया जा रहा है। वर्तमान में, कंपनी मालदीव, तुर्की और बोत्सवाना में विभिन्न परियोजनाओं का कार्यांवयन करके लगातार राजस्व अर्जन कर रहा है। एनबीसीसी ने ओमान में एक कार्यालय खोला है और सल्तनत ऑफ ओमान तथा पड़ोसी देशों में अवसंरचना परियोजनाओं को प्राप्त एवं निष्पादित करने के लिए अल नबा सर्विसेज एल एल सी के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा विदेशों में संभावनाएं तलाशने के लिए कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री डेवलपमेंट बोर्ड होल्डिंग्स, मलेशिया तथा फॉर्म यापी मालज़ेमेलेरी इंसात सामायी टिकारेट लिमिटेड, तुर्की के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर)

एनबीसीसी अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए, पूरे देश में विभिन्न निगमित सामाजिक दायित्व (सीएसआर) गतिविधियों में लगा हुआ है। निगमित सामाजिक दायित्व की विभिन्न योजनाओं के तहत, कंपनी देश के विभिन्न स्थानों पर गांव के स्कूलों में बायो-डाइजेस्टर शौचालय के निष्पादन कार्य, शिक्षा के लिए गरीब स्कूली बच्चों को छात्रवृत्ति प्रदान करने, विभिन्न ट्रेडों में श्रमिकों के कौशल विकास में मदद आदि कार्यों में भागीदारी कर रहा है।

सहायक कंपनियॉं

एनबीसीसी द्वारा हाल ही में निम्‍नलिखित सहायक कंपनियाँ गठित की गई हैं:-

  • एनबीसीसी सर्विसेज लिमिटेड : एनबीसीसी सर्विसेज लिमिटेड नाम से एक पूर्ण स्‍वामित्‍व वाली सहायक कंपनी 16.10.2014 को गठित की गई, जिसका मुख्‍यालय नई दिल्‍ली में स्थित है। इसका मुख्‍य उद्देश्‍य कंपनी के स्वयं या किसी अन्य सरकारी उपक्रमों / अर्द्ध सरकारी उपक्रमों / निकाय निगमों / सोसायटियों / ट्रस्ट / निजी संस्थानों / गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) अथवा अन्य संगठन की ओर से सीएसआर परियोजनाओं और संबंधित गतिविधियों को शुरू करने के लिए निष्पादन और कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में कार्य करना है। सतत परियोजनाओं, विरासत इमारत जीर्णोद्‌धार कार्य आदि के लिए निष्पादन और कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में इसे अनिवार्य रूप से चयनित किया गया है। एनबीसीसी द्वारा पूर्ण की गई प्रमुख परियोजनाओं के रखरखाव तथा आंतरिक नवीयन कार्य के लिए एनबीसीसी को निष्‍पादन एजेंसी नियुक्‍त किया गया है। इस प्रकार यह सेवार्थियों को आरंभ से अंत तक सेवाएं प्रदान कर रही है।
  • रियल एस्‍टेट डेवलेपमेंट एण्‍ड कन्‍स्‍ट्रक्‍शन कार्पोरेशन ऑफ राजस्‍थान लिमिटेड: कंपनी अधिनियम 2013 के अधीन रियल एस्‍टेट डेवलेपमेंट एण्‍ड कन्‍स्‍ट्रक्‍शन कार्पोरेशन ऑफ राजस्‍थान लिमिटेड नाम से एक संयुक्‍त उद्यम कंपनी की स्थापना दिनांक 07.09.2015 को की गई। इसका उद्देश्‍य संपूर्ण राजस्‍थान में विभिन्‍न पुनर्विकास परियोजनाओं को प्राप्‍त करना है।
  • एनबीसीसी इंजीनियरिंग एण्‍ड कन्‍सल्‍टेंसी लिमिटेड (एनईसीएल) : : एनबीसीसी द्वारा 15.12.2015 को एनबीसीसी इंजीनियरिंग एण्‍ड कन्‍सल्‍टेंसी लिमिटेड (एनईसीएल) नाम से एक पूर्ण स्‍वामित्‍व वाली सहायक कंपनी का गठन किया गया है। यह नवगठित कंपनी एनबीसीसी के परामर्श कार्यों तथा एनबीसीसी के छत्र के तले अन्‍य सरकारी एवं निजी संगठनों को परामर्श सेवाएं प्रदान करेगी तथा एक स्‍वसंधारणीय लाभ प्राप्‍त करने वाली कंपनी होगी।