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स्थावर संपदा विकास

एनबीसीसी की स्थापना निर्माण, आवास एवं आपूर्ति मंत्रालय (एमओडब्ल्यूएचएस) जोकि अब शहरी विकास मंत्रालय (एमओयूडी) के नाम से जाना जाता है, के अधीन भारत सरकार के पूर्ण स्वामित्व में एक सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनी के रूप में नवंबर,1960 में हुई। तब से लेकर अब तक सिविल इंजीनियरिंग के सभी पहलुओं पर परियोजना प्रबंधन परामर्शदाता और संविदाकार की हैसियत से भारत में और विदेश में कई गुना वृद्धि की है और निर्माण कंपनी के रूप में प्रसिद्‌धि प्राप्त की है। कंपनी ने वर्ष 1988 में स्थावर संपदा कारोबार में कदम रखा और उसके बाद से बाजार में उल्लेखनीय प्रगति की है। वास्तव में एनबीसीसी स्थावर संपदा में कदम रखने वाला पहला केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है।

भारतीय अर्थव्यवस्था प्रगति कर रही है औरआवासीय तथा वाणिज्यिक परिसरों आदि की मांग और आपूर्ति के के बीच बहुत बड़ा अंतर है। भारतीय निर्माण क्षेत्र में स्थावर संपदा विकास और प्रबंधन एक महत्वपूर्ण और लाभदायक क्षेत्र के रूप में उभरा है । हालांकि स्थावर संपदा के प्रति लोगों की भावनाओं में कमी देखी जा रही है।

वर्तमान में, एनबीसीसी स्थावर संपदा में कार्यरत भारत सरकार की एकमात्र कंपनी है। स्थावर संपदा व्यापार में आवासीय, वाणिज्यिक और संस्थागत परियोजनाओं का विकास भी शामिल हैं जिसके लिए या तो भूमि पार्सल खरीदकर या संयुक्त उपक्रम / भागीदारी के द्‌वारा परियोजना का कार्य करती है।

उद्देश्य

  • बॉटम लाइन लाभप्रदता को बनाए रखने के लिए उचित दरों पर आवास उपलब्ध कराना।
  • वापसी की उचित दरों के साथ प्रतिस्पर्धी दरों पर वाणिज्यिक निर्मित संपत्ति प्रदान करना।
  • आधुनिक सुविधाओं युक्त आवासीय और वाणिज्यिक परिसर / संपत्ति प्रदान करना।
  • न केवल बिक्री योग्य सुपर एरिया की गणना बल्कि रियल एस्टेट व्यापार के अन्य पहलुओं / गतिविधियों में भी पारदर्शिता बनाए रखना।
  • निर्धारित पर्यावरण और सुरक्षा मानकों को बनाए रखते हुए उच्च मानकों के गुणवत्ता उत्पाद प्रदान करना।
  • राजस्व में वृद्धि को बनाए रखने और पर्याप्त नकदी प्रवाह बनाए रखने के लिए लाभ कमाना।
  • निगम की बॉटम लाइन के काफी हद तक और लगातार मुनाफे में योगदान।
  • एक विविध रियल एस्टेट कंपनी बनना और शेयरधारकों के विकास और लाभ के लिए लगातार रिटर्न प्राप्त करना।